सलूंबर। धारोद रोड पर हुए दर्दनाक हादसे में 55 वर्षीय जोरावर सिंह कानावत की मौत
के बाद क्षेत्र में जनाक्रोश फूट पड़ा। शनिवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों, समाजजनों और जनप्रतिनिधियों ने सलूंबर-ऋषभदेव स्टेट हाईवे-53 पर धरना देकर प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
आक्रोशित लोगों ने कई घंटों तक सड़क जाम रखी, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ दिन पूर्व आए तेज तूफान और आंधी के दौरान सड़क किनारे स्थित आम का पेड़ क्षतिग्रस्त होकर सड़क की ओर झुक गया था। खतरनाक स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार संबंधित विभाग को मौखिक सूचना दी, लेकिन समय रहते पेड़ और उसकी टूटी टहनियों को नहीं हटाया गया। लोगों का कहना है कि इसी लापरवाही का खामियाजा जोरावर सिंह कानावत को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

घटना के बाद शनिवार सुबह से ही ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। अतिरिक्त जिला कलेक्टर, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन शुरुआत में लोग आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हुए। बाद में समाजजनों और परिजनों की 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसने कलेक्ट्रेट में प्रशासन के साथ विस्तृत वार्ता की।

बैठक में मृतक परिवार को आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा दुर्घटना की निष्पक्ष जांच की मांग रखी गई। प्रशासन ने संबंधित मामले में विभागीय प्रक्रिया शुरू करने और नोटिस जारी करने की जानकारी दी, लेकिन प्रदर्शनकारी इससे पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए।धरना-प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। मौके पर छप्पन मंडल अध्यक्ष अमरा पटेल, सलूंबर प्रधान देवेंद्र सिंह, जिला कांग्रेस अध्यक्ष परमानंद मेहता, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सहित भाजपा एवं कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने मृतक परिवार को न्याय दिलाने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कराने की मांग की।

विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता मणिलाल मेघवाल भी ग्रामीणों के निशाने पर रहे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों की लगातार अनदेखी की गई है। कई लोगों ने अधिकारी को तत्काल हटाने तथा विभागीय जांच कराने की मांग उठाई।










