ढलानों पर खेती की नई राह: सलूंबर में 447 बेंच टेरेसिंग कार्य पूरे 89.40 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि का हुआ सृजन, 447 किसानों को मिला सीधा लाभ | जल एवं मृदा संरक्षण को मिली रफ्तार

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सलूंबर, 16 अगस्त। जिले में जल एवं मृदा संरक्षण के साथ कृषि योग्य भूमि के विस्तार को लेकर जिला प्रशासन की पहल अब जमीन पर असर दिखाने लगी है। जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. के निर्देशन में बेंच टेरेसिंग कार्यों को प्राथमिकता से कराया जा रहा है। इसके तहत 16 अगस्त 2026 तक जिले में 447 बेंच टेरेसिंग कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। इन कार्यों से 447 किसानों को लाभ मिला है और 89.40 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि योग्य भूमि विकसित हुई है।

 

झल्लारा में सबसे अधिक 191 कार्य पूरे

जिले के झल्लारा, सलूंबर और लसाड़िया ब्लॉक में बेंच टेरेसिंग कार्य कराए गए हैं।
झल्लारा में 191 कार्य पूरे हुए, जिससे 191 किसानों को लाभ मिला और 38.20 हेक्टेयर भूमि विकसित हुई।
सलूंबर ब्लॉक में 135 कार्य पूर्ण कर 135 किसानों को लाभान्वित किया गया तथा 27 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि भूमि का सृजन हुआ।

वहीं लसाड़िया में 121 कार्य पूर्ण हुए। इससे 121 किसानों को लाभ मिला और 24.20 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि योग्य भूमि विकसित हुई।

MJSA और PMKSY से बदल रही तस्वीर

बेंच टेरेसिंग के कार्य मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA) 2.1/2.2, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY 2.0) सहित राज्य मद के तहत कराए जा रहे हैं। इनका मुख्य उद्देश्य ढलान वाली भूमि को कृषि उपयोग के लिए बेहतर बनाना, वर्षा जल का संरक्षण करना और मिट्टी के कटाव को रोकना है।
जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. द्वारा जल संरक्षण एवं भूमि विकास कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

अब 135 और कार्यों की तैयारी

जिले में आगामी चरण के लिए 135 बेंच टेरेसिंग कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें झल्लारा में 20, सलूंबर में 50, जयसमंद में 33 और लसाड़िया में 32 कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से 135 किसानों को लाभ मिलने तथा करीब 27 हेक्टेयर अतिरिक्त कृषि योग्य भूमि विकसित होने की संभावना है।

किसानों को मिलेंगे कई फायदे

बेंच टेरेसिंग से ढलान वाली भूमि पर मृदा कटाव कम होगा, बारिश के पानी का बेहतर संचयन होगा और खेतों में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी। इससे वर्षा आधारित खेती को मजबूती मिलने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
जिला प्रशासन का फोकस अब जल बचाने के साथ जमीन को खेती के लिए अधिक उपयोगी बनाने पर है। सलूंबर में बेंच टेरेसिंग के बढ़ते काम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

और पढ़ें

नौली स्कूल में देशभक्ति के रंग में रंगा स्वतंत्रता दिवस समारोहसरपंच नानूराम मीणा व प्रधानाचार्य ने फहराया तिरंगा, विद्यार्थियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां | अतिथियों का माला-उपर्णा ओढ़ाकर सम्मान

नावड़ा में नदी पार करना पड़ा जानलेवा, बुजुर्ग महिला की बहने से मौत क्षतिग्रस्त पुल ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी, पशुओं के बाड़े की ओर जाते समय हादसा | घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति आक्रोश

error: Content is protected !!