सलूंबर, 17 अगस्त। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ-2026 में किसानों को बीमा का लाभ दिलाने के लिए कृषि विभाग ने कवायद तेज कर दी है। फसल बीमा करवाते समय पोर्टल पर गांव का नाम नहीं दिखने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने संबंधित अधिकारियों से ऐसे गांवों का पूरा विवरण तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जानकारी मिलते ही गांवों के नाम राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अपडेट किए जाएंगे।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि खरीफ फसलों के बीमा की निर्धारित अंतिम तिथि 16 अगस्त थी। किसानों की सुविधा और अधिकाधिक किसानों को योजना से जोड़ने के उद्देश्य से बीमा अवधि को 20 अगस्त तक बढ़ाने का अनुरोध भारत सरकार से किया गया है। अवधि बढ़ने की स्थिति में गैर-ऋणी किसानों के साथ बटाईदार सहित अन्य पात्र किसान भी अपनी फसलों का बीमा करवा सकेंगे।
पोर्टल पर गांव नहीं दिखने की शिकायतें पहुंचीं
कृषि विभाग ने राजस्व मंडल से प्राप्त विलेज मास्टर के आधार पर गांवों का विवरण राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर अपलोड करवाया है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि बीमा करवाते समय किसानों को अपने गांव का नाम पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रहा है।
विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी गांवों की जानकारी निर्धारित प्रारूप में शीघ्र भेजी जाए, ताकि पोर्टल पर आवश्यक संशोधन करवाकर किसानों को बीमा कराने में परेशानी न हो।
पात्र किसान बीमा से वंचित नहीं रहेगा
कृषि विभाग का कहना है कि पोर्टल पर तकनीकी या गांव के नाम से जुड़ी समस्या के कारण कोई पात्र किसान फसल बीमा के लाभ से वंचित न रहे, इसे प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों को शिकायतों का तेजी से निस्तारण कर आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने को कहा गया है।
नए प्रावधानों से बढ़ी पारदर्शिता
इस बार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों की सुविधा और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। फसल बीमा की प्रति सात दिन में उपलब्ध कराने तथा सर्वेयर की नियुक्ति में देरी या सर्वे रिपोर्ट समय पर नहीं देने पर पेनल्टी जैसे प्रावधान शामिल हैं।
वहीं, फार्मर आईडी को अनिवार्य किए जाने से बीमा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगने की उम्मीद है। कम प्रीमियम दरों और नए प्रावधानों के चलते किसानों में भी योजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।









