
कहा… ये राम भरत लक्ष्मण शत्रुघ्न जैसे भाइयों का प्रेम देख लो। अखिल आर्यवर्त
भारतवर्ष के चक्रवर्ती साम्राज्य अयोध्या का राज्य सिंहासन का त्याग विश्व में बड़ा
उदाहरण है, वैसा कही नहीं l राम कहते भरत तुम राज्य संभालो, भरत कहते नहीं नहीं प्रभु राज्य तो आपका ही है, मैं तो आपका चरण सेवक हूँ। ऐसा समर्पण सिखाती है रामायण। ऐसी महान कथा विश्व में कोई नहीं l
आज जो महापुरुष हैं, उनका वर्तमान हमारा भविष्य है l अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर ईश्वरानंद ब्रह्मचारी ध्यानयोगी महर्षि उत्तम स्वामी जी ने श्रीराम कथा का प्रारंभ हजारों भक्तों के साथ हनुमान चालीसा का संगीतमय साथ किया l
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