समर्पण सिखाती है रामायण :- उत्तम स्वामीजी राम भरत भाइयों के प्रेम का प्रतीक

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अयोध्याधाम l चित्रकूट में रमे रहे तुलसी अवध नरेश, जिन पर विपदा आन पड़ी, वो आवत है इस देश । चित्रकूट तीर्थ की महिमा बताते हुए गुरुदेव उत्तम स्वामी जी ने चित्रकूट में कामता नाथ पर्वत पर श्रीराम भरत मिलाप का प्रसंग बहुत ही कारुणिक स्वर में वर्णित किया। इस प्रसंग में श्रोता भी भावुक हो गए और स्वयं स्वामीजी का गला भर आया। कहा… ये राम भरत लक्ष्मण शत्रुघ्न जैसे भाइयों का प्रेम देख लो। अखिल आर्यवर्त भारतवर्ष के चक्रवर्ती साम्राज्य अयोध्या का राज्य सिंहासन का त्याग विश्व में बड़ा उदाहरण है, वैसा कही नहीं l राम कहते भरत तुम राज्य संभालो, भरत कहते नहीं नहीं प्रभु राज्य तो आपका ही है, मैं तो आपका चरण सेवक हूँ। ऐसा समर्पण सिखाती है रामायण। ऐसी महान कथा विश्व में कोई नहीं l
गुरुदेव ने आगे कहा हमारे महापुरुषों का जो पुरुषार्थ है, हमारे पूर्वजों का जो शौर्य, गौरव, जो उनका भूतकाल है, वो हमारा वर्तमान है। हमारा वर्तमान उनके त्याग से ही है l और आज जो महापुरुष हैं, उनका वर्तमान हमारा भविष्य है l अनंत श्री विभूषित महामंडलेश्वर ईश्वरानंद ब्रह्मचारी ध्यानयोगी महर्षि उत्तम स्वामी जी ने श्रीराम कथा का प्रारंभ हजारों भक्तों के साथ हनुमान चालीसा का संगीतमय साथ किया l
प्रारंभ में पौथी पूजा मुख्य यजमान बद्री प्रसाद सोनी और परिवार ने की l मंच पर श्रीराम मंदिर के ट्रस्टी चम्पत राय,राम बाबा और पण्डित दिव्य भारत पंड्या और संतों ज़न प्रतिनिधि उपस्थित थे l

रिपोर्टर  चन्द्र शेखर मेहता

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