कठिनाइयों के सफ़र में भी कुछ रस्ते आसान मिलेंगे थके हारे पांव के नीचे मंज़िल के निशान मिलेंगे

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राजसमंद काव्य गोष्ठी मंच द्वारा दीपावली स्नेह मिलन एवं एकता दिवस के उपलक्ष्य में विराट काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अफ़ज़ल खान अफ़ज़ल ने की मुख्य अतिथि उदयपुर के हास्य कवि श्री मनोहर श्रीमाली विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रीय कवि सुनील व्यास एवं मधुर गीतकार परितोष पालीवाल थे,,नीतू बाफना ने सरस्वती वंदना के साथ मंदिर की मूरत सा पावन निर्मल है ज्योति गंगा जल,, गीत सुना समा बांध दिया,, कमलेश जोशी ने,, मां बाप का मान बेटियां हर घर का सम्मान बेटियां मार्मिक कविता सुना सबको सोचने पर मजबूर कर दिया,,राजकुमार शर्मा ने,, पुराने वो शज़र गुम हो गए है परिन्दों के भी घर गुम हो गए है,,जीतेन्द्र पालीवाल ने,, ये मुहब्बत है क्या आज तुझको बता दूं जान अपनी तिरंगें पर ऐसे लूटा दूँ,, नरेन्द्र चंचल ने आसमां कितना ऊंचा है कोई कह नहीं सकता,, कुमार दिनेश ने,, परिन्दा वक्त का ऐसा उड़ा गा कर वाहवाही लूटी,, शेख हनीफ़ रिज्वी ने,, रंजों गम सबको मत बताया कर लाख मुश्किल हो मुस्कुराया कर,, राम गोपाल आचार्य ने,, गरीब की खाली हो थाली तो कैसे दिवाली मने,,, डॉ मनोहर श्रीमाली ने हास्य कविता हथनी सी बेगम मारी और मैं दो पस्ली की काया,,, भजों रे मन गोविन्द से लोट पोट कर दिया,, राहुल दीक्षित ने,, मेरी तबीयत के बारे में तुम इतना मत सोचो मैं पहले से बेहतर हूँ तुम्हारें जाने के बाद,,सुनिल व्यास ने,, गांव की पगडण्डियों पर जब नंगे पांव चला सिखा तब जाना जमीन से जुड़ने वाले लोग ही आसमान की परिभाषा लिखते हैं, शेख अब्दुल हमीद ने,,फिर कभी बतालाएंगे,,सूर्य प्रकाश दीक्षित ने ग़ज़ल,, कठिनाइयों के सफ़र में भी कुछ रस्ते आसान मिलेंगे, थके हारे पांव के नीचे मंज़िल के निशान मिलेगे, गोविन्द औदिच्य ने,, किसी के काम आए उसे इंसान कहते है, परितोष पालीवाल ने,, जो समझना चाहते हो मेरी समझ तो यूं करो,जिन्दगी मेरी तरह कभी जीकर मर कर देख ले ,, गौरव पालीवाल ने,,ये मन मंदिर प्रेम का शब्द प्रेम के बोल,,अनमोल आचार्य ने,, मैं तेरे पास हूँ तू मेरे पास हूँ,,गोपाल शर्मा ने बुलबुल मारा चैतकड़ा तू दौड़ तुरक की छाती पे,,, हिमांशी पालीवाल ने ,, अंधेरों में राह दिखाता दीपक अपना कर्म निभाता ,, अफ़ज़ल खां अफ़ज़ल ने,, जब तक धमननियों में रक्त की गति तेज थी तुम्हारें सिवा कुछ भी अच्छा नहीं लगता था,, चन्द्र शेखर नारलाई नें संचालन करते हुए, कई कविताएं मुक्तक सुना समा बांध दिया,, सतीश आचार्य ओम प्रकाश पालीवाल दीपक सनाढ्य नरेन्द्र सिंह रावल, ललित साहू आदि गणमान्य उपस्थित थे, अतं में सरदार वल्लभभाई पटेल के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया गया ।

संवाददाता अन्नू राठौड़

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