राजसमंद दिनांक 24 जनवरी 2026 को सांय 4:30 बजे साकेत साहित्य संस्थान की इस वर्ष की पहली काव्यगोष्ठी का आयोजन सूचना केंद्र ,राजसमंद में अध्यक्ष वीणा वैष्णव की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में जिले के अनेक प्रबुद्ध कवि और साहित्यकार उपस्थित रहे ,तथा बतौर मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार कुसुम अग्रवाल उपस्थित रही।
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ साहित्यकार कुसुम अग्रवाल ने अपनी मधुर सरस्वती वंदना ” तार दे, तार दे ,वीणा पाणी तार दे ” से की।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी कलमकारों ने अपनी रचना के माध्यम से समाज को विभिन्न सकारात्मक संदेश देने के प्रयास किए, जिसमें सर्वप्रथम कुसुम अग्रवाल ने ” ऐसा बसंत कब आएगा ?” , वीणा वैष्णव ने “मैं शिक्षक हूं” , चंद्रशेखर नारलाई ने ” मां भारती स्नेहिल आंचल है : तिरंगा हमारी आन” , कुमार दिनेश ने “क्या होगा कब ,ये हमें आज थोड़ी पता होगा” , डॉ संपत रेगर ने ” जैसे मोबाइल क्या हो गया जिंदगी हो गया ” , कमल अग्रवाल ने ” जब पत्नी ने अलमारी में आज अखबार बिछाया, मैंने कहा यह तो आज का है” , राधेश्याम राणा ने ” क्या तन मांझना रे, एक दिन माटी में मिल जाणो रे ” और अंत में भावना पालीवाल ने एक राजस्थानी गीत “करसां वालो देराड़लो” सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का संचालन कोषाध्यक्ष राधेश्याम राणा ने किया। अंत में महासचिव कमल अग्रवाल ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।