अप्रैल के बाद ही बजेगा नगरीय निकाय चुनाव का बिगुल 196 निकायों में 24 मार्च को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, 22 अप्रैल को अंतिम प्रकाशन; हाईकोर्ट की समयसीमा पर संशय

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प्रदेश में नगरीय निकाय चुनावों की आहट तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 39 जिलों की 196 शहरी निकायों में मतदाता सूची तैयार करने का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस कार्यक्रम के अनुसार 24 मार्च को मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद 28 दिनों तक आपत्तियां और दावे लिए जाएंगे। सभी दावों के निस्तारण के पश्चात 22 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
इस कार्यक्रम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वास्तविक मतदान प्रक्रिया अप्रैल के बाद ही संभव हो पाएगी।
जबकि राजस्थान हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 तक निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। आयोग ने अपने आदेश में न्यायालय के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा है कि उसी की अनुपालना में चुनावी तैयारियां शुरू की गई हैं। इन नगर निगमों में होंगे चुनाव चुनाव जिन प्रमुख नगर निगमों में प्रस्तावित हैं,वेहैंअजमेर,बीकानेर,भरतपुर,जयपुर,अलवर
जोधपुर,कोटा,उदयपुर
नगर परिषदों में भी चुनावी सरगर्मी
नगर परिषद श्रेणी में जिन शहरों में चुनाव प्रस्तावित हैं, उनमें प्रमुख हैं
सलूंबर,निम्बाहेड़ा,बांसवाड़ा,बूंदी,बारां,जालोर
बालोतरा,बाड़मेर,सीकर,दौसा,सवाई माधोपुर
हनुमानगढ़,श्रीगंगानगर,नागौर,किशनगढ़
(अन्य परिषद क्षेत्रों में भी इसी कार्यक्रम के तहत चुनाव प्रक्रिया संचालित होगी।)
पंचायती राज चुनाव से अलग व्यवस्था
इधर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर भी स्पष्टता आई है। पंच और सरपंच के चुनाव मतपत्र से कराए जाएंगे, जबकि जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से संपन्न होंगे। इसके लिए मध्यप्रदेश से मशीनें मंगाई जाएंगी। पिछली बार खर्च का ब्यौरा प्रस्तुत नहीं करने वाले प्रतिनिधियों पर भी आयोग की नजर है और ऐसे प्रत्याशियों पर चुनाव लड़ने पर रोक की कार्रवाई संभव है।
राजनीतिक असर
निर्वाचन कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ गई है। ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की चर्चा के बीच निकाय और पंचायत चुनावों का अलग-अलग कार्यक्रम सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें 22 अप्रैल को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची और उसके बाद घोषित होने वाली चुनाव तिथियों पर टिकी हैं। स्पष्ट है कि शहरी निकायों में सत्ता का समीकरण तय करने वाला चुनावी महासमर अप्रैल के बाद ही अपने चरम पर पहुंचेगा।

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