सलूम्बर नगर परिषद में 8 करोड़ के टेंडर पर बवाल बोर्ड भंग होने के बाद प्रशासक पर मनमानी खर्च का आरोप, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

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सलूम्बर। नगर कांग्रेस कमेटी, सलूम्बर ने नगर परिषद सलूम्बर के प्रशासक पर बोर्ड कार्यकाल समाप्त होने के बाद मनमाने ढंग से वित्तीय निर्णय लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में राज्यपाल महोदय के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर सलूम्बर के माध्यम से प्रेषित किया गया है।
ज्ञापन में बताया गया कि नगर परिषद सलूम्बर का बोर्ड 7 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके पश्चात राज्य सरकार द्वारा आवश्यक कार्यों के संचालन हेतु प्रशासक नियुक्त किया गया। आरोप है कि प्रशासक नियुक्ति के मात्र एक माह के भीतर करीब 8 करोड़ रुपये के टेंडर जारी कर दिए गए, जिनमें कई ऐसे कार्य भी शामिल हैं जहां तत्काल आवश्यकता नहीं है।
नगर कांग्रेस कमेटी का कहना है कि वर्तमान में कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, ऐसे में इन कार्यों की निगरानी कैसे होगी। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य सरकार द्वारा अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई के प्रथम सप्ताह में नगर निकाय चुनाव कराए जाने की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसे में अल्पकालिक अवधि के लिए नियुक्त प्रशासक द्वारा बड़े पैमाने पर टेंडर जारी करना आमजन में शंका उत्पन्न कर रहा है।
“जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट” का आरोप
ज्ञापन में कहा गया है कि नगर में बड़े कार्यों के लिए सामान्यतः नगर परिषद बोर्ड की स्वीकृति आवश्यक होती है ताकि जनप्रतिनिधियों की निगरानी में कार्य संपादित हो सके। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में बिना बोर्ड की स्वीकृति इतने बड़े वित्तीय निर्णय लेना पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
नगर कांग्रेस कमेटी ने इसे “जनता की गाढ़ी कमाई की बंदरबांट” बताते हुए इन टेंडरों को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही अनुरोध किया गया है कि भावी निर्वाचित बोर्ड की स्वीकृति के बाद ही संबंधित कार्यों को मंजूरी दी जाए, ताकि किसी प्रकार के भ्रष्टाचार की आशंका न रहे और आमजन में सकारात्मक संदेश जाए।
ज्ञापन के साथ प्रशासक द्वारा जारी टेंडरों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या इन टेंडरों की समीक्षा की जाएगी।

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