सलूम्बर। नगर के मध्य स्थित देवस्थान भूमि एवं ऐतिहासिक मीठे पानी की बावड़ी को लेकर विवाद फिर से चर्चा में आ गया है। मंदिर से जुड़े लोगों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर भूमि से संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पूर्व में गलत तथ्यों एवं कथित रूप से जाली दस्तावेजों के आधार पर भूमि का भू-परिवर्तन किया गया था। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि संबंधित भूमि देवस्थान की संपत्ति है तथा इसके राजस्व रिकॉर्ड, भू-अभिलेख और अन्य दस्तावेजों की पुनः जांच कराई जानी चाहिए।
मंदिर पक्ष ने ऐतिहासिक मीठे पानी की बावड़ी के संरक्षण और उससे जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।
ज्ञापन में राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई है। जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
देवस्थान भूमि और बावड़ी से जुड़ा यह मामला लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। अब जांच की मांग के बाद यह विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।