पहाड़ी जमीन बनेगी उपजाऊ, तीन विभाग मिलकर तैयार करेंगे किसानों के विकास का रोडमैप

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सलूंबर। जिले के पहाड़ी और ढालू क्षेत्रों में कृषि विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रशासन ने बेंच टेरेसिंग कार्यों की प्रभावशीलता बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है।
इसी क्रम में जिला कलक्टर मोहम्मद जुनैद पी.पी. ने गुरुवार को झल्लारा क्षेत्र का दौरा कर जलग्रहण विभाग द्वारा कराए गए बेंच टेरेसिंग कार्यों का मौके पर निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिला कलक्टर ने स्पष्ट किया कि भूमि संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े कार्यों का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने जलग्रहण, कृषि एवं राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार करने और नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
कलक्टर ने कहा कि बेंच टेरेसिंग से विकसित हुई नई कृषि भूमि को शीघ्र उत्पादन से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए।
इसके लिए क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत एवं लाभकारी फसलों का चयन कर किसानों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि लघु एवं सीमांत कृषकों की आय में ठोस बढ़ोतरी हो सके।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि नव विकसित कृषि क्षेत्रों में बोई जाने वाली फसलों का रिकॉर्ड राजस्व अभिलेखों और गिरदावरी में नियमित रूप से दर्ज किया जाए। इससे भूमि उपयोग और कृषि विस्तार की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन संभव होगा।
जिला कलक्टर ने संबंधित विभागों से संयुक्त आदेश का प्रारूप तैयार कर आगामी सोमवार तक प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेंच टेरेसिंग जैसी गतिविधियां केवल मिट्टी और पानी के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि योग्य भूमि के विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रभावी माध्यम भी हैं।
निरीक्षण के दौरान जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के अधीक्षण अभियंता रतन सिंह भाटी, कृषि एवं जलग्रहण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। :::

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