सलूंबर। जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को जिला चिकित्सालय सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला कलक्टर मुहम्मद जुनैद पी.पी. ने की।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए जिला कलक्टर ने चिकित्सा विभाग, पुलिस, उपखंड प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर मामलों का विश्लेषण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के कारणों की पहचान कर ग्राम सभाओं, आंगनबाड़ी केंद्रों, आशा व एएनएम कार्यकर्ताओं तथा महिला समूहों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही विद्यालयों और महाविद्यालयों में मनोचिकित्सकों द्वारा विशेष सत्र आयोजित कर विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाए।
दस्त रोग नियंत्रण अभियान की समीक्षा करते हुए कलक्टर ने 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे तक ओआरएस और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पिछले वर्ष दस्त जनित मृत्यु के आंकड़ों का विश्लेषण कर इस वर्ष प्रभावी रोकथाम के प्रयास बढ़ाने, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ओआरएस-जिंक कॉर्नर स्थापित करने तथा ग्रामीण सेवा शिविरों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकाधिक एक्स-रे जांच कराने, उपचाराधीन मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग करने और उच्च जोखिम समूह की स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को अधिक से अधिक लाभान्वित करने तथा गर्भवती महिलाओं का व्यापक पंजीयन सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
जिला कलक्टर ने संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, एनीमिया स्क्रीनिंग के शत-प्रतिशत लक्ष्य, कम हीमोग्लोबिन वाले मरीजों को एफसीएम इंजेक्शन उपलब्ध कराने तथा चिकित्सा संस्थानों में दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एम्बुलेंस सेवाओं के नियमित निरीक्षण और टीबी मरीजों के फॉलोअप को भी प्राथमिकता देने को कहा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेंद्र परमार ने बताया कि जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों का सात दिनों के भीतर ओडीके एप के माध्यम से निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना, मां वाउचर योजना तथा लाडो प्रोत्साहन योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताई।
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए एएनसी पंजीयन बढ़ाने, संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने, पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने तथा परिवार कल्याण कार्यक्रम के लक्ष्यों की प्राप्ति पर जोर दिया गया। वहीं गैर संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की रक्तचाप और शुगर जांच कर उसे ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी अधिकारी, पीएमओ, बीसीएमओ तथा चिकित्सा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।