सांसारिक व्यक्ति भोग की पर्याप्त वस्तु पास होने पर भी प्यासा होता है- आचार्य पुलक सागर

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सलूंबर । नगर के श्रमण भवन में विराजित राजस्थान सरकार के राजकीय अथिथि भारत गौरव राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर गुरुदेव ने अपने पहले प्रवचन में कहा कि समंदर में मोजूद अथाह जल राशि के बावजूद जिस प्रकार मछली प्यासी रहती है उसी प्रकार इंसान संसार में सभी तरह की भौतिक सुख सुविधाओं को पा कर भी अपने आप को सुखी महसूस नहीं करता जितना अपने पास होता है उससे अधिक की चाह में अपनी ज़िंदगी खपा देता है आचार्य श्री ने अपने
प्रवचन में जैन और जैनत्त्व की परिभाषा भी बताई । मुनि संघ अध्यक्ष दिनेशचन्द्र ढालावत ने बताया कि राष्ट्र संत पुलक सागर जी गुरुदेव ससंघ का प्रवास आगामी मार्च माह के मध्य तक सलूंबर नगर में ही रहेगा । प्रवचन से पहले पूर्वाचार्य व दीक्षा गुरु आचार्य पुष्पदंत सागर जी गुरुदेव की गुरु पूजन की गई व प्रवचन के समापन पर रेखा राजकुमार गड़िया परिवार द्वारा गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया गया एवं सायंकाल में आनंद यात्रा के पश्चात गोवर्धनलाल परिवार की तरफ़ से आचार्य श्री की आरती की गई इस अवसर पर समाज के सेठ लक्ष्मीलाल ढालावत मुनि संघ सचिव अक्षय गड़ीया भवरलाल ढालावत कन्हैयालाल भीमावत अशोक गांधी भूपेन्द्र पारडिया महावीर दोषी मोहन सेरावत दिनेश मालवी आदेश्वरलाल सिंघवी मणिलाल मालवी देवेंद्र भीमावत पुष्पा गुणावत सुमित्रा भीमावत भगवती दोषी मंजु तोरावत वर्षा कुणीया सरिता गांधी राज कुमारी कोठारी भानु दोषी जया भीमावत पुस्पलता कोडीया लीना पारडिया मैना पारडिया कल्पना कोडीया फाल्गुनी कोठारी सहित सेंकडो श्रावक उपस्थित थें।

रिपोर्ट गर्ग

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