राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) उपशाखा सेमारी द्वारा शिक्षकों की प्रमुख मांगों को लेकर उपखण्ड अधिकारी श्री सुरेश कुमार बलाई एवं तहसीलदार श्री डुंगरलाल प्रजापत को मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम अपनी मांगों को लेकर उपखण्ड कार्यालय के बहार जोरदार नारे बाजी के साथ प्रदर्शन किया और ज्ञापन सोंपा जिला अध्यक्ष अम्बा लाल खटीक ने बताया कि
संगठन की प्रमुख मांगों में सबसे पहले शिक्षकों के सभी संवर्गों के स्थानांतरण की मांग शामिल है। विशेषकर तृतीय श्रेणी के स्थानांतरण पिछले सात वर्षों से लंबित हैं। इसके अलावा, सभी संवर्गों की पदोन्नति शीघ्र की जानी चाहिए। इनमें प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी, व्याख्याता से वाइस प्रिंसिपल तथा द्वितीय वेतन श्रंखला से व्याख्याता तक की प्रमोशन डीपीसी वर्षों से नहीं हो पाई है। सरकार ने भले ही 33,000 पदों पर पदोन्नति की है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कई पद रिक्त हैं और कार्य लंबित हैं। इसमें जीरो टॉलरेंस नीति की तरह ‘जीरो डीपीसी’ की आवश्यकता है और इसके लिए एक स्पष्ट टाइम फ्रेमवर्क तय किया जाना चाहिए उपशाखा अध्यक्ष पंकज कलाल ने कहा कि
तीसरी प्रमुख मांग वेतन विसंगति से जुड़ी हुई है। तृतीय वेतन श्रंखला के शिक्षक व प्रबोधक, जो 2005 से 2010 के मध्य नियुक्त हुए, उन्हें 11,170 पर फिक्स किया गया है जबकि उन्हें 12,900 पर फिक्स किया जाना चाहिए था। इस विसंगति को यथाशीघ्र दूर किया जाना चाहिए। चौथी मांग शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की है। ऑनलाइन डाटा प्रविष्टि, उपस्थिति, एनजीओ के माध्यम से सरकारी आदेशों का निष्पादन, भवन निर्माण कार्य, बीएलओ जैसी जिम्मेदारियां शिक्षकों पर लाद दी गई हैं, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। इन कार्यों को शिक्षकों से हटाया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, संविदा शिक्षकों का मुद्दा भी गंभीर है। राज्य में 35,000 संविदा शिक्षक, 7,500 शिक्षाकर्मी व पैरा-टीचर हैं। इन्हें स्थायी किया जाना चाहिए। पूर्व सरकार द्वारा क्रमोन्नत किए गए सीनियर सेकेंडरी विद्यालयों में आज भी व्याख्याता व अन्य पद सृजित नहीं किए गए हैं। लगभग सवा लाख पद रिक्त पड़े हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही है। इन पदों पर शीघ्र भर्ती की जाए।
हमारी अन्य मांगों में कंप्यूटर अनुदेशक के पदनाम परिवर्तन, लाइब्रेरियन, पीटीआई व तृतीय वेतन श्रंखला के शिक्षकों की पदोन्नति शामिल है। हम मांग करते हैं कि शिक्षकों को उनके सेवा जीवन में कम से कम तीन पदोन्नतियां मिलें और 18 वर्ष की सेवा के पश्चात राजपत्रित अधिकारी का दर्जा दिया जाए। जिस प्रकार अन्य विभागों जैसे ग्राम पंचायत राज में पदोन्नतियों का लाभ दिया गया है, उसी प्रकार शिक्षकों को भी यह लाभ मिलना चाहिए।
खेमराज समिति की रिपोर्ट भी यह कहती है कि अनिवार्य रूप से तीन पदोन्नतियां दी जानी चाहिए। सभी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तृतीय वेतन श्रंखला के स्थान पर द्वितीय श्रंखला के पद सृजित किए जाएं और व्याख्याता पदों की संख्या भी बढ़ाई जाए।
सरकार ने इन मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई है, इसीलिए संगठन ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। उपशाखा सेमारी के सभी कार्यकर्ता ने माननीय मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। अगर सरकार ने हमारी माँगे नहीं मानी तो आगे उग्र आंदोलन करेंगे
इस अवसर लक्ष्मण लाल मीणा,किशन लाल खटीक, जवान सिंह मीणा वाकपीठ अध्यक्ष, सेमारी, केशव रेबारी,हँसमुख कलाल,गजेन्द्र वैष्णव, भगवान लाल पटेल,लक्ष्मण सिंह शक्तावत, पुष्पा मीणा, पदम मीणा,भूरी देवी,राकेश औदीच्य, रतन लाल मीणा,प्रदीप सालवी,राहुल जैन,भगवती लाल मीणा,चंद्र प्रकाश जैन,चंद्र शेखर चौबीसा, राजेन्द्र प्रसाद,राजेन्द्र मीणा, किरपा मीणा, जयेंद्र सिंह,मान सिंह मीणा,शंकर हँगीला,शिक्षा कर्मी प्रतिनिधि मणिलाल मीणा,प्रेमशंकर पटेल,सी.पी,मीणा,यशवंत मीणा विरेन्द्र सिंह चुन्नी लाल मीणा,शिक्षा सहयोगी प्रतिनिधि रतनलाल मीणा,सहयोगी नारायण लाल हुलिया,शंकर लाल आदि उपस्थित रहे उक्त जानकारी लक्ष्मी कांत वैष्णव ने दी