


ऐतिहासिक निर्णय को चुनौती दी है।राजस्थान पेंशनर समाज, भारत देश में वर्ष 1972 से समान अधिकारों के साथ नियमित रूप से पेंशन प्राप्त करने वाले देश के करोड़ों पेंशनरों के हितों पर कुठाराघात करने वाले,इस वित्त विधेयक का पुरजोर विरोध करता है,क्योंकि 7वीं सीपीसी जिसे 01/01/2016 से पहले और 01/01/2016 के बाद सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों के बीच समानता बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा स्वीकार किया गया था। यह विधेयक इस प्रकार की समानता को खत्म कर देता हैं। इसके अलावा जबसे 8 वीं सीपीसी की घोषणा की गई है। देश भर के पेंशनभोगी अपने पेंशन संशोधन और 01/01/2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए पेंशनभोगियों और 01/01/2026 (8 वीं सीपीसी की सिफारिशों की अपेक्षित तिथि) के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनभोगियों के बीच समानता बनाए रखने के बारे में यितित हैं। वर्तमान निर्णय पेंशनभोगियों के लिए यह एक बड़ा झटका है और इसलिए सरकार को इस पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की आवश्यकता है। जिला राजस्थान पेंशनर समाज के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर राजस्थान पेंशनर समाज की हमारी शाखा केंद्र सरकार के इस निर्णय का घोर विरोध करते हुए उन्हें इस विधेयक पर पुनर्विच्चार कर पेंशनरों के हित में निर्णय लेने का अनुरोध करती है। आप को अवगत करवा दें कि यदि विधेयक में पेंशनरों पर कुठाराघात संबंधी बिंदु नहीं हटाए गए तो राजस्थान पेंशनर समाज को पूरे प्रदेश में आंदोलनात्मक रुख अपनाने को मजबूर होना पड़ेगा।आज ज्ञापन के बाद आगे चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। उम्र के इस पढ़ाव में पेंशनरों को सड़क पर उतरने और आमरण अनशन पर बैठने की जिम्मेदारी आपकी होगी।WhatsApp us