सलूंबर जैन बोर्डिंग में राष्ट्रीय आयुष मिशन एवं आयुर्वेद विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय निशुल्क आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर का सफल समापन हुआ। शिविर के दौरान कुल 326 मरीजों ने ओपीडी सेवाओं के माध्यम से उपचार प्राप्त किया, जिससे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक सशक्त हुआ।
शिविर में विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श, जांच एवं उपचार की समुचित व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में मरीजों की भागीदारी ने शिविर की सफलता को दर्शाया।
इन रोगों का हुआ उपचार
शिविर में संधिवात, वातिक शूल, त्वचा रोग, रक्त विकार एवं बाल रोग से संबंधित मरीजों का उपचार किया गया।
डॉ. अनिल कुमार एवं डॉ. जगन्नाथ वर्मा के निर्देशन में पंचकर्म चिकित्सा को लेकर मरीजों में विशेष उत्साह देखने को मिला। शिविर के दौरान 35 मरीजों को विस्तृत पंचकर्म पद्धति से उपचारित किया गया।
42 बच्चों का स्वर्ण प्राशन संस्कार
आयुर्वेद विभाग के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मीणा द्वारा बाल रोग सेवाएं प्रदान की गईं। इस दौरान 42 बच्चों का स्वर्ण प्राशन संस्कार कर उन्हें आयुर्वेदिक उपचार दिया गया।
एनसीडी रोगों की जांच व परामर्श
डॉ. जितेन्द्र जोशी एवं डॉ. अश्विनी जोशी द्वारा हृदय रोग, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसे गैर-संचारी रोगों की जांच की गई। शिविर में कुल 78 लोगों की एनसीडी (NCD) स्क्रीनिंग कर आवश्यक परामर्श दिया गया।
31 मरीज ऑपरेशन के लिए भर्ती
शल्य चिकित्सा विभाग में डॉ. सुनील कुमार, डॉ. जीत पटेल, डॉ. सतीश गुसर, डॉ. लोकेश पांचाल एवं डॉ. प्रियंका जैन द्वारा अर्श एवं भगंदर रोग से पीड़ित मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 31 मरीजों को ऑपरेशन हेतु भर्ती किया गया।
स्त्री रोग संबंधी सेवाएं डॉ. रीना मीणा एवं डॉ. ममता जोशी द्वारा प्रदान की गईं।
योग और आयुर्वेद का सफल समन्वय
शिविर के दौरान योग सत्रों का भी आयोजन किया गया। मरीजों को उनकी बीमारी के अनुरूप योगासन बताए गए, जिससे उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक संतुलन में सकारात्मक सुधार महसूस किया।
आयुर्वेद के प्रति बढ़ता विश्वास
शिविर ने यह सिद्ध किया कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति गंभीर एवं जटिल रोगों के उपचार में प्रभावी है। शिविर प्रभारी डॉ. अत्तर हुसैन, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. जितेन्द्र जोशी, सहायक शिविर प्रभारी डॉ. सीताराम गुप्ता ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं प्राचीन चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।