सलूम्बर। शहर में बीसा नागदा दिगंबर जैन समाज द्वारा संचालित शिवसागर जैन पाठशाला में रविवार को भक्ति और संस्कारों से ओतप्रोत विशेष धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। आचार्य चंद्र सागर और मुनि आज्ञासागर महाराज के पावन सानिध्य में लगभग 40 बालक-बालिकाओं ने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक कर शांतिधारा की, जिससे वातावरण धर्ममय हो उठा।
प्रतिष्ठाचार्य पंडित कमलेश जैन के मार्गदर्शन में बच्चों ने श्वेत वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक अभिषेक किया। इसके पश्चात नवदेवता पूजन संपन्न हुआ तथा भगवान श्री मल्लिनाथ के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाडू अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की गई। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन, भक्ति और संस्कारों की झलक स्पष्ट दिखाई दी।
शिवसागर जैन पाठशाला पिछले छह दशकों से समाज में धार्मिक मूल्यों का संवर्धन कर रही है। यहां बच्चों को पूजा-विधि के साथ-साथ संयम, अनुशासन और नैतिक जीवन की शिक्षा दी जाती है, जिससे वे आधुनिकता के बीच भी अपनी संस्कृति से जुड़े रहें।
इस आयोजन की सबसे प्रेरक पहल रही मोबाइल फोन से दूरी का संकल्प। जिन बच्चों ने एक माह, पंद्रह दिन, सात दिन अथवा पांच दिन तक मोबाइल का उपयोग नहीं करने का व्रत लिया, उन्हें शांतिधारा करने का विशेष अवसर प्रदान किया गया। समाजजनों ने बच्चों के इस संयम और दृढ़ निश्चय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे नई पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बताया।
कार्यक्रम में पूजन सामग्री की व्यवस्था सोहनलाल देवचंद सिंघवी द्वारा की गई, जबकि अल्पाहार की व्यवस्था मोहनलाल चंपालाल सेरावत परिवार ने संभाली। देवेंद्र भीमावत, श्रीपाल मालवी, डॉ. कुंदन खेतावत, मनोहर सिंघवी, कांतिलाल गुरुजी सहित युवा साथियों ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
धार्मिक आस्था और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन का संदेश देता यह आयोजन शहर में चर्चा का विषय बना रहा।