मिट्टी की सेहत पर फोकस: ‘धरती माता बचाओ अभियान’ के तहत गांव-गांव जागरूक हो रह किसान

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सलूंबर, 8 अप्रैल। पर्यावरणीय असंतुलन और लगातार घटती मृदा उर्वरता की चुनौती से निपटने के लिए कृषि विभाग सलूंबर ने एक सराहनीय पहल करते हुए ‘धरती माता बचाओ अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों में किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से छोटी-छोटी गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है।
इन गोष्ठियों में किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभागीय विशेषज्ञों द्वारा बताया जा रहा है कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, ऐसे में जैविक खेती को अपनाना समय की जरूरत बन गया है।
कार्यक्रमों के दौरान किसानों को जैविक खाद, जीवामृत और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। साथ ही, सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से मिट्टी की जांच कर सही मात्रा में उर्वरक उपयोग करने की सलाह दी जा रही है, जिससे उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो सके।
क्षेत्र की प्रमुख फसल मक्का की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत बीजों और वैज्ञानिक तकनीकों पर भी चर्चा की जा रही है। इसके अलावा, जल संरक्षण के उपायों पर जोर देते हुए ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उर्वरता को सुरक्षित रखने का एक मजबूत संकल्प है। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित इन गोष्ठियों में किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है और वे प्राकृतिक खेती की दिशा में कदम बढ़ाने का संकल्प भी ले रहे हैं।
विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल न केवल किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने में सहायक है, बल्कि सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे किसानों तक पहुंचाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।

और पढ़ें

error: Content is protected !!