मोहर्रम की आठवीं पर अलमों का जुलूस निकला, गूंजे या हज़रत अब्बास के नारे पारंपरिक छड़ी मिलन बना आकर्षण का केंद्र, सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ आयोजन

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सलूम्बर। इस्लामिक माह मोहर्रम की आठवीं तारीख पर बुधवार शाम नगर में हज़रत अब्बास अलैमुस्सलाम की याद में अलमों का जुलूस श्रद्धा और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे मार्ग पर “या हज़रत अब्बास” की सदाओं से वातावरण गूंजता रहा और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला।

जुलूस की शुरुआत बाहर का शहर स्थित मस्जिद चौक से हुई। अलम विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए गांधी चौक, होली चौक और नागदा बाजार पहुंचे। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया तथा मोहर्रम की परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
जुलूस के अंदर का शहर पहुंचने पर दोनों क्षेत्रों के अलमों का पारंपरिक छड़ी मिलन समारोह आयोजित किया गया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। छड़ी मिलन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और धार्मिक परंपरा के इस प्रतीकात्मक आयोजन को नजदीक से देखा।
इसके बाद दोनों जुलूस अपने-अपने निर्धारित मार्गों पर आगे बढ़े। अंत में बाहर का शहर क्षेत्र में अंतिम छड़ी मिलन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजन में युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।
मोहर्रम इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन हज़रत इमाम हुसैन और हज़रत अब्बास की कुर्बानी, वफादारी और इंसानियत के संदेश को याद करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम का पर्व सत्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।
पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। जुलूस शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिससे नगर में भाईचारे और सामाजिक समरसता का संदेश भी प्रसारित हुआ।

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