उदयपुर। जीबीएच हॉस्पिटल की सीएमएचओ कार्यालय से गई टीम द्वारा जांच भी आधी-अधूरी,इलाज में लापरवाही पर कोई कार्रवाई नहीं है का जवाब नहीं मिला है।जांच रिपोर्ट- मरीज को गैस्ट्रो सर्जरी की जरूरत थी, इसकी सुविधा जीबीएच अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑपरेशन के लिए मना किया। जी.बी.एच. मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल बेड़वास उदयपुर को परिवादी नरेश जणवा जलोदा जागीर द्वारा जीबीएच अस्पताल के विरुद्ध की गई शिकायत को लेकर डॉ. अशोक आदित्य यादव मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उदयपुर ने 5 मार्च को पाबंद किया था। मरीज शंकरलाल देवड़ा के ईलाज में लापरवाही एवं रेफर करने में देरी की शिकायत को लेकर जांच कमेटी में एडिशनल सीएमएचओ डॉ. रागिनी अग्रवाल और मां वाउचर योजना के जिला समन्वयक डॉ.शरद शामिल थे। जांच में पाया गया कि अस्पताल द्वारा मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में पोर्टल पर क्वेरी जनरेट करने के बाद जवाब सबमिट करने में देरी की थी। हॉस्पिटल प्रबंधक को पाबन्द किया था कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में भर्ती करने एवं डिस्चार्ज करने की कार्यवाही में अस्पताल सुधार कर लें, ताकि भविष्य में किसी मरीज को परेशानी ना हो। साथ ही मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के कार्मिकों को अपने व्यवहार एवं कार्यप्रणाली के लिए पाबन्द करने को कहा। भविष्य में अस्पताल के विरुद्ध शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पीड़ित ने हॉस्पिटल के खिलाफ मरीज को एन वक्त पर ऑपरेशन के लिए मना करने की शिकायत भी की थी, इस पर सीएमएचओ कार्यालय की तरफ से कुछ भी तथ्य पेश नहीं किए थे और ना ही इस बारे में जांच के बाद कोई जिक्र था। इस शिकायत के बाद पीड़ित को सीएमएचओ कार्यालय से बताया गया कि सीएमएचओ कार्यालय द्वारा की गई जांच में यह आया कि जीबीएच हॉस्पिटल में गैस्ट्रो सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण ऑपरेशन के लिए मना किया, अब इसमें सवाल उठता है कि जब सुविधा नहीं थी तो ऑपरेशन के लिए औपचारिकता पूरी क्यों करवाई गई और इतना बड़ा हॉस्पिटल होने के बावजूद गैस्ट्रो सर्जरी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो क्यों ? अगर किसी प्रकार की सुविधा नहीं है तो उससे संबंधित मरीज को भर्ती ही क्यों किया जाता है। मरीज देवड़ा के दामाद नरेश जणवा जलोदा जागीर ने इसकी शिकायत प्रतापनगर थाना उदयपुर में भी कर रखी है। इसको लेकर भी पुलिस अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर जांच कर रही है। इस पर भी अभी तक अस्पताल प्रशासन ने ढिलाई बरती और अभी तक जवाब नहीं दिया है। जांच अधिकारी एएसआई पर्वत सिंह सिसोदिया है।
AIIMS (एम्स) लिखे बोर्ड से भी लोग असमंजस में पड़ जाते है।
पाली के एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि वे कुछ माह पहले ही एम्स (ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज) को लेकर असमंजस से इस (AIIMS) अमेरिकन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी जीबीएच हॉस्पिटल बेडवास उदयपुर आ गए थे। बाद में इलाज सही नहीं होने व भारी भरकम बिल बनाने के चलते मुझे अपने मरीज को दूसरी जगह ले जाना पड़ा, क्योंकि वास्तव में यह भारत सरकार का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स , AIIMS) नहीं होकर अमेरिकन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस है।
यह है मामला…..
प्रार्थी नरेश जणवा जलोदा जागीर ने बताया कि अस्पताल में उनके ससुर शंकर लाल देवड़ा खेरोदा को जीबीएच अस्पताल बेड़वास में 24 जनवरी को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत भर्ती करवाया गया था। गैस्ट्रो सर्जरी के लिए 26 जनवरी को रात 9:30 औपचारिकता पूरी कर साइट पर अपलोड कर दिया था। डॉक्टर शिवराज ने भी अपनी ओर से ऑपरेशन के लिए औपचारिकता पूरी कर दी थी। 27 जनवरी को अचानक से डॉक्टर शिवराज ने बोला कि मैं ऑपरेशन की रिस्क नहीं ले सकता हूं और काम की वजह से दो चार दिन के लिए बाहर जा रहा हूं। हॉस्पिटल मैनेजमेंट, संचालक अनिल भट्ट, मैनेजर युवराज सिंह और गैस्ट्रो सर्जन डॉ शिवराज के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की थी।