कलेक्टर जुनेद पी.पी. की सख्त मॉनिटरिंग रंग लाई, डोर-टू-डोर सर्वे और मेडिकल टीमों की सक्रियता से हालात नियंत्रण में

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सलूम्बर, 8 अप्रैल। जिले के लसाड़िया क्षेत्र के घाटा और लालपुरा गांवों में बच्चों की मौतों से उपजे भय के बीच अब राहत भरी खबर सामने आई है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सघन निगरानी के चलते पिछले तीन दिनों से कोई नया गंभीर मरीज सामने नहीं आया है, जिससे हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं।
जिला कलेक्टर मुहम्मद जुनेद पी.पी. के नेतृत्व में प्रशासन ने लगातार ग्राउंड स्तर पर सक्रियता बनाए रखी। हाई-लेवल बैठकों के जरिए स्थिति की समीक्षा की गई और अलग-अलग मेडिकल टीमों को फील्ड में उतारकर घर-घर सर्वे कराया गया। इसी का परिणाम है कि संभावित खतरे पर समय रहते काबू पाया जा सका।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. महेन्द्र कुमार परमार ने बताया कि पूर्व में घाटा पंचायत और लालपुरा क्षेत्र में अज्ञात बीमारी के चलते पांच बच्चों की मौत हुई थी। हालांकि बाद में सामने आया कि 7 अप्रैल को हुई दो मौतें अन्य कारणों से थीं। वहीं 8 अप्रैल को छोटी विरवा गांव के एक बच्चे को गंभीर हालत में झल्लारा से सलूम्बर जिला अस्पताल और वहां से उदयपुर रेफर किया गया, जिसमें डायबिटिक कीटोएसिडोसिस की आशंका जताई गई।
घर-घर सर्वे से बनी सुरक्षा कवच
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को संभालने के लिए बड़े स्तर पर सर्वे अभियान चलाया। मेडिकल टीमों ने 528 परिवारों तक पहुंचकर बच्चों की स्क्रीनिंग की, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य जांच की गई और संदिग्ध मामलों पर लगातार नजर रखी गई।
सर्वे के दौरान 9 ब्लड सैंपल लिए गए और 18 से अधिक सैंपल जांच के लिए भेजे गए। साथ ही 51 स्थानों पर एंटीलार्वा गतिविधियां भी की गईं।
झल्लारा क्षेत्र में भी स्थिति सामान्य
झल्लारा खंड के अमलोदा गांव में एक बालक की मृत्यु के बाद तत्काल RRT टीम गठित कर 107 घरों का सर्वे किया गया। जांच में 500 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हुई, लेकिन किसी में भी संदिग्ध लक्षण नहीं पाए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
प्रशासन की अपील: सावधानी जरूरी
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है।
बुखार, उल्टी, ऐंठन जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सलाह लेने, उबला पानी पीने और साफ-सफाई बनाए रखने की हिदायत दी गई है। साथ ही अफवाहों से दूर रहने को कहा गया है।
निष्कर्ष:
घाटा और लालपुरा में हालात अब स्थिर हो चुके हैं और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। हालांकि बीमारी के असली कारणों की जांच अभी जारी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जा सके।

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